भरोसाविरोधी मामले में गूगल के खिलाफ भारत ने शुरु की जाँच

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भारत ने एंड्राएड भरोसाविरोधी मामले में गूगल के खिलाफ जाँच का आदेश दे दिया है। इंडिया टूडे के अनुसार, भारतीय प्रतिद्वंद्विता आयोग ने पिछले वर्ष की एक मामले में जाँच करने का फैसला किया है।

यह जाँच पूरी होने में लगभग 1 वर्ष का समय लेगी जिसके लिये आयोग गूगल अधिकारियों से भी पूछताछ कर सकती है। यदि यह आरोप सही साबित होती है, तब गूगल को अंतिम 3 वित्तीय वर्षों के दौरान उसकी वेब ब्राउजर और खोजी इंजन से हुयी आय का 10 प्रतिशत तक जुर्माना भरना पड़ेगा।

इस जाँच के बारे में सतही जानकारी ही मिली है। इसकी वजह यह है कि प्रतिद्वंद्विता आयोग ने इस जाँच को अबतक सार्वजनिक नहीं किया है।

हालाँकि यह मामला कोई नयी चीज नहीं है। इससे पहले भी गूगल यूरोपीय आयोग के आरोपों का दंश झेल चुकी है।

मार्च में, यूरोपीय आयोग ने कंपनी पर भरोसाविरोधी नियमों को तोड़ने का दोषी पाया जिसमें गूगल ने अपनी विज्ञापन औजार एडसैंस का उपयोग करने से त्रिपक्षीय कंपनियों (गूगल की विज्ञ-ब्रोकरिंग प्रतिद्वंद्वियों) को रोक दिया। यह जुर्माना 2018 में गूगल की कुल कारोबार का 1.29 प्रतिशत है जो €1.49 बिलियन है।

इसके अलावा गूगल पर खोजी इंजन में अनियमितता का भी आरोप लग चुकी है। तब गूगल ने यूरोपीय एंड्राएड उपयोक्ताओं को मनपसंद ब्राउजर और खोजी इंजन चुनने का विकल्प देने की उद्घोषणा किया था।

अभीतक यह अस्पष्ट है कि प्रतिद्वंद्विता आयोग यूरोपीय आयोग की राह पर चल रही है या वह गूगल के खिलाफ नयी समीकरणों पर काम कर रही है। ऐसे में गूगल भारत में अपनी यूरोपीय नीति की राह अपना सकती है।

हालाँकि इसके लिये प्रतिद्वंद्विता आयोग की तरफ से पुष्टि का इंतजार है। जब आयोग इसपर साफगोई से अपनी राय देगी, तब जाकर इस मामले पर कुछ बोलना बेहतर होगी। आयोग इस जाँच को पूरी करने में 1 वर्ष का वक्त ले सकती है।

छवि स्त्रोत: Pixabay

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