41% आवाजी सहायक उपयोक्ता आवाज व कृबु पर “कम” भरोसा करते हैं

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कृत्रिम बुद्धिमता ऐसी बला है जो लोगों की जीवनस्तर को बेहतर बनाने में बेहतर योगदान दे रही है, विशेषकर दिव्यांगों के मामले में, जहाँ सुगम्यता अपनेआप में एक बड़ी मुद्दा है लेकिन निजता, सुरक्षा, भरोसा जैसे कठिन पैमानों पर यह कहीं पीछे भी दिखायी देती है।

हालाँकि यह कोई गंभीर मामला नहीं है क्योंकि आज की जरुरत ही आँकड़े हैं। जिनके पास आँकड़ों का अथाह भंडार है, वही आज राजा हैं और यह एक अनकही सच्चाई है। हर कोई ज्यादा आँकड़ों के पीछे पड़े हैं क्योंकि इन्हें पता है कि इंसान मरते हैं पर आँकड़े नहीं।

यहाँ पर हम माइक्रोसोफ्ट की एक प्रतिवेदन की प्रविष्टि कर रहे हैं जो कृत्रिम बुद्धिमता और आवाज आधारित अनुप्रयोगों पर बातें करती है। यहाँ उस सवाल का भी जवाब तलाशने की कोशिश की गयी है कि कैसे किसी प्रौद्योगिकी पर भरोसा किया जाये लेकिन एक बात बताइये कि किस नयी चीज पर लोगों ने एक बार में भरोसा कर लिया?

इधर हमारे लोग अपनी आँकड़ों को मुफ्त में फेसबुक और वाईफाई फाइंडर एप पर बाँट देते हैं। और फिर बोलते हैं कि हमारे आँकड़ों का दुरुपयोग हो रही है!

हाँ, कुछ लोग हैं जो इनके साथ खिलवाड़ करेंगे और तालाब की एक गंदी मछली की वजह से पूरी तालाब गंदी मान ली जाती है। और हमारे लोग ऐसे ही हैं, बड़े ही मासूम और जज्बाती!

लेकिन प्रौद्योगिकी निर्माता ग्राहकों को भरोसे में कैसे लेंगे, इसके लिये माइक्रोसोफ्ट की विपणन बुद्धिमता दल ने बिंग एड्स विपणन के साथ मिलकर कुछ सवालों के जवाब तलाशे हैं।

  • 80% डिजीटल सहायक उपयोक्ता थोड़े या बहुत संतुष्ट हैं

अभी अपने शुरुआती दौर में होने के बावजूद, आवाजी और कृबु एप के उपयोक्ता इनका उपयोग करना पसंद करते हैं। वे इनका उपयोग तीन बुनियादी कामों, जैसे तथ्यपरक जाँच, दिशानिर्देश लेने और किसी खास सेवा/उत्पाद की खोज करने हेतु करते हैं।

अधिकतर लोग स्मार्ट स्पीकर पर गाने सुनना पसंद करते हैं।

 

  • 41% उपयोक्ता भरोसा, निजता और अक्रिय श्रवण पर चिंता जताते हैं

जबतक लोग आवाजी प्रौद्योगिकी पर पूर्णतः भरोसा नहीं करेंगे, तबतक आप इसकी 100 प्रतिशत क्षमता का उपयोग नहीं कर पायेंगे। हालाँकि जब अंतर्जाल शुरु हुयी थी, तब भी ऐसी ही समस्या थी जिसे समय के साथ भुला दी गयी।

आवाजी उपयोक्ता आँकड़ा सुरक्षा और अक्रिय श्रवण को अपनी अहम चिंताओं के तौर पर दर्ज कराते हैं। ऐसे में यह प्रौद्यो निर्माताओं पर निर्भर करती है कि वे अपने ग्राहकों के लिये सुरक्षित वातावरण कैसे बनायेंगे जहाँ वे इनकी एपों का सुगम्य उपयोग करते हुये व्यक्तिगत सूचना साझा करेंगे।

 

  • आधे लोगों का मानना है कि अगले 5 वर्षों में वे डिजीटल सहायकों के जरिये सामान खरीदेंगे

लोग हमेशा नयी तकनीक के साथ अपनी तेजी बढ़ाते रहेंगे और ऐसे में डिजीटल सहायक एप उनको तेजी देती है। इसकी मदद से वे कम समय में ज्यादा काम करने की आदत बना पायेंगे। इससे दुकानों पर असर पड़ सकती है जहाँ अभी दुकान खुलने-बंद करने की तय समय भविष्य में धूमिल पड़ सकती है। प्रतिवेदन कहती है कि लोग अगले 5 वर्षों में छवि, रिटेल चैटबोट और डिजीटल सहायक एपों की मदद से सामान खरीदेंगे।

 

अगर आप माइक्रोसोफ्ट की इस प्रतिवेदन को पढ़ना चाहते हैं, तब आप इस कड़ी पर जा सकते हैं।

छवि स्त्रोत: Pixabay

क्या आप जानते हैं कि आपके द्वारा पढ़ा गया यह पोस्ट हजारों को प्रेरित करने वाली है? यदि इसका जवाब हाँ है तो आप अपने वही विचार यहाँ भी दे सकते हैं।

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