गूगल ने विवादित कृबु नीति बोर्ड भंग किया

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कृत्रिम बुद्धिमता (आँग्ल: आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस) के उपयोग की निगरानी करने के लिये गूगल ने एक सलाहकार समिति बनाया था।

जिसे अब गूगल ने भंग कर दिया है।

दरअसल हुआ यह कि गूगल ने समिति के सदस्य के रुप में हेरिटेज फाउंडेशन संस्थापक के कोल्स जैम्स को शामिल किया था जो संरक्षणवादी व पुरातनपंथी बयानों के कारण काफी विवादित रहे हैं। इस सलाहकार समिति का नाम एडवांस्ड टेक्नोलोजी एक्सटर्नल एडवाइजरी काउंसिल रखा गया था जिसमें कृबु, दर्शनशास्त्र, मानसिक विज्ञान, रोबोटिक्स और राजनीति जैसे क्षेत्रों से लोगों को चुना गया था।

यहाँ विवाद उन राजनीतिक चरित्रों की वजह से हुआ जो अमेरिकी मीडिया में काफी विवादित रहे हैं और जिस दिन इसकी उद्घोषणा हुयी, उसी दिन से गूगल के भीतर भी अंतर्विरोध देखने को मिला।

इस समिति का निर्माण इस उद्देश्य के साथ किया गया था ताकि गूगल उन नियमों का अनुपालन कर सकेगी जिसे पिछले वर्ष गूगल सीईओ सुंदर पिचई ने बनाया था। पिछले वर्ष खबर आयी थी कि कंपनी अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के लिये किसी मशीन लर्निंग परियोजना पर काम शुरु करेगी।

हालाँकि बाद में गूगल ने इसपर काम करने से इन्कार कर दिया था और तब उसने कहा था कि वह अंतर्राष्ट्रीय नियमों के विरुद्ध जाकर किसी भी कृबु हथियार का निर्माण नहीं करेगी और अनुप्रयोग या परियोजना पर काम नहीं करेगी।

वर्तमान परिदृश्य में कृबु सलाहकार समिति काम नहीं कर पायेगी”, गूगल प्रवक्ता ने द भर्ज को कहा। इसलिये हम इसे भंग कर रहे हैं। हम महत्वपूर्ण मुद्दों पर खुद की जिम्मेदारी लेते हुये कृत्रिम बुद्धिमता पर काम करते रहेंगे। हम इन चीजों पर दूसरे तरीकों से बाहरी विचार ले सकते हैं।

गौरतलब है कि गूगल के हजारों कर्मचारियों ने जैम्स को समिति से हटाने के लिये मीडियम पर एक पोस्ट भी किया। इसके अलावा अन्य जगहों से भी बुलंदी के स्वर तेज हुये। गूगल जितना बाहर से परेशान हुयी, उससे ज्यादा परेशानी उसे अपने कर्माचरियों से झेलनी पड़ी जिसके बाद गूगल को मजबूरन इस समिति को भंग करना पड़ा।

विशेष: गूगल सर्वर पर मौजूद संचिका (कृबु नीति बोर्ड के सदस्यों के नाम) को मिटा दिया गया है।

(अद्यतन 1705-10042019)

छवि स्त्रोत: Pixabay

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