फ्रांस डिजीटल दिग्गजों से कर वसूलेगी, अमेरिका ने जताया रोष

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फ्रांस ने एक नयी कर (टैक्स) की अवधारणा को साकार कर दिया है जो अबतक काल्पनिक थी।

फ्रांस सरकार ने गूगल, फेसबुक, एपल जैसी दिग्गज प्रौद्योगिकी कंपनियों पर डिजीटल कर लगाने की उद्घोषणा पिछले वर्ष ही कर दी थी और इसका नाम भी रोचक है: गाफा यानि गूगल, अमेजन, फेसबुक और एपल। हालाँकि अमेरिका इस मामले को लेकर अपनी नाटो साथी से नाराज दिख रही है।

इस इंटरनेट कर को फ्रांसीसी संसद ने मंजूरी दे दी है जिसे 55 मतों के साथ पारित किया गया और विरोध में महज 4 मत पड़े। गौरतलब है कि 5 सांसदों ने मतदान में हिस्सा भी नहीं लिया।

इस विधेयक को अब सीनेट से पारित करवाया जायेगा जिसके बाद यह पूर्ण कानून बन जायेगी। इसके मुताबिक जिन कंपनियों की वैश्विक राजस्व €750 मिलियन (~ ₹59 अरब) और फ्रांस में €25 मिलियन (~ ₹196 करोड़) से अधिक होगी, उनसे 3% राजस्व कर वसूली जायेगी।

यदि आप इस विधेयक को गौर से देखें तो इसे इस तरह से बनाया गया है कि यह उन सभी डिजीटल कंपनियों पर लागू होती है जो अमेरिका, चीन, भारत से आते हैं। इन कंपनियों में स्थानीय फ्रांसीसी कंपनियाँ भी शामिल हैं जिन्हें विदेशी कंपनियों ने खरीद लिया है।

फ्रांसीसी वित्त मंत्री ब्रूनो ले माइरे इस विधेयक को पारित करवाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। उनके मुताबिक, यह 21वीं सदी की कर है।

उन्होंने कहा है कि फ्रांसीसी सरकार इस डिजीटल कर को लागू करके €500 मिलियन हासिल कर पायेगी। उन्होंने तर्क दिया है कि फ्रांस में होने वाली कमाई पर विदेश (अमेरिका, चीन, भारत, आदि पढ़िये) में कर लगायी जाती है जो सही नहीं है। हालाँकि फ्रांस के इस प्रयास को आयरलैंड और लक्जेमबर्ग से सहानुभूति नहीं मिली है जहाँ वह पूरी यूरोपीय संघ में इस कानून की वकालत कर रही है।

इस बीच अमेरिका ने कहा है कि यह कानून अमेरिकी कंपनियों के साथ फ्रांसीसी नागरिकों को प्रभावित करेगी जो उनकी मंचों का उपयोग करते हैं।

छवि स्त्रोत: Pexels

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