ओनलाइन पोर्नोग्राफी हेतु उम्र सत्यापन लानेवाली पहली देश बनी ब्रिटेन

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यूके में 18 वर्ष की कमउम्र वाले किशोर-किशोरी व्यस्क सामग्री नहीं देख पायेंगे। इसके लिये यूके संसद ने कमर कस ली है।

“व्यस्क सामग्री देखना बच्चों के लिये बहुत आसान हो गयी है”, यूके डिजीटल मंत्री मार्गोट जैम्स ने कहा। “हम यूके को ओनलाइन तौर पर दुनिया की सबसे सुरक्षित जगह बनाना चाहते हैं और ये नयी नियम हमें ऐसा हासिल करने में मदद करेंगी।”

सनद रहे कि यूके संसद ने 2017 में डिजीटल अर्थव्यवस्था विधेयक पेश किया था। इस कानून के तहत वाणिज्यिक पोर्न सजालों को सत्यापित करना पड़ेगा कि कोई ब्रिटिश उपयोक्ता 18 वर्षीय या उससे अधिक उम्र के हैं और तभी उन्हें व्यस्क सामग्री देखने की अनुमति मिलेगी।

ब्रिटिश सैंसर किसी व्यस्क सामग्री को उसकी प्रकृति के आधार पर प्रतिबंधित कर पायेगी जो 15 जुलाई से प्रभावी होगी। इसके साथ ब्रिटिश बोर्ड ओफ फ्लिम क्लासिफिकेशन ने अपनी पोस्ट में कहा है कि पोर्नोग्राफी की आसान पहुँच ने युवाओं के लिये स्वस्थ संबंध, सेक्स और मंजूरी के मायने बदल दिये हैं।

बोर्ड ने यह भी जोड़ा है कि 7-17 वर्षीय बच्चों के 88% अभिभावक पोर्नोग्राफी में उम्र बाध्यता चाहते हैं।

गौरतलब है कि इस विधेयक में निजता नियमितता को शामिल नहीं किया गया है कि पोर्न सजाल ब्रिटिश उपयोक्ताओं की जानकारियों के साथ खिलवाड़ नहीं करेंगी पर ये सभी सजालें यूरोपीय संघ की साधारण आँकड़ा सुरक्षण नियमन यानि जीडीपीआर द्वारा नियंत्रित होंगी।

इसके साथ एक और प्रावधान किया गया है। जो सजालें उम्र सत्यापन की प्रक्रिया नहीं अपनायेंगी, उन्हें आधिकारिक रुप से काला सूची में डाल दिया जायेगा। ब्रिटिश आईएसपी (इंटरनेट सेवा प्रदाता) इन सजालों को अवरुद्ध करेंगे और इन्हें कोई भी किसी तरह का भुगतान नहीं कर पायेंगे।

यह वाकई विवाद का विषय है कि ट्विटर, रेड्डिट जैसी मुख्यधारा की सामध्यमा सजालों को इस उम्र सत्यापन से छूट मिली हुयी है जहाँ पोर्नोग्राफिक सामग्रियों की अच्छी-खासी आपूर्ति होती है। इससे ब्रिटिश संसद की उद्देश्य नाकाफी प्रतीत होती है जहाँ बच्चे आसानी से व्यस्क सामग्री ढूँढ लेंगे।

वहीं भीपीएन भी बाजार में छा चुकी है। ऐसी हालत में कुछ किशोर फिल्टर का उपयोग करेंगे और इस तरह सजालें मानेंगी कि उम्र सत्यापन की जरुरत नहीं है। इसके अलावा इस बात का भी अंदेशा है कि इससे ओनलाइन पायरेसी को बढ़ावा मिल सकती है जहाँ वे किसी लोकर सजाल या फाइल-शेयरिंग नेटवर्क से ऐसी वीडियो हासिल करेंगे।

हालाँकि अधिकतर लोगों का मानना है कि ऐसी तरकीबें हर किसी के बस की नहीं हैं। सो, बहुत कम लोग इन नियमों को धता बता पायेंगे।

छवि स्त्रोत: Pixabay

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