कृबु प्रणालियाँ जवाबदेह, व्याख्यात्मक व निष्पक्ष हो, यूरोपीय संघ का आदेश

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कंपनियाँ और सरकारें कृत्रिम बुद्धिमता का किस तरह उपयोग कर सकती हैं, इसपर यूरोपीय संघ ने एक दिशानिर्देश जारी कर दिया है।

गौर से देखें तो ये दिशानिर्देश धरातल पर आसानी से लागू नहीं की जा सकती हैं पर इन नियमों की व्याख्या से एक चीज स्पष्ट है कि यूरोपीय संघ कृबु की खतरनाक शक्तियों से सशंकित है और हर किसी को होना चाहिये जो एक विकसित समाज में सर्वसमावेशी सहभागिता चाहते हैं।

यूरो संघ की दिशानिर्देश का असर उन सभी क्षेत्रों में पड़ेगी जहाँ कृत्रिम बुद्धिमता की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भूमिका होगी। आज कई कंपनियाँ कृबु का उपयोग स्वास्थ्य. शिक्षा और उपभोक्ता प्रौद्योगिकी में कर रही हैं और इनसे जुड़े उपकरणों को बाजार में उतार रही हैं।

यूरोपीय संघ ने सात-सूत्री कार्यक्रम पेश किया है जिन्हें हर कृबु प्रणालियों को अपनाना चाहिये। हालाँकि इनका पूर्ण अनुपालन हो पाना संभव नहीं है।

इसमें कुछ बिंदु ऐसे हैं जहाँ कंपनियाँ अपनी सीमा से परे जाकर ऐसा नहीं कर पायेगी। जैसे, कंपनियाँ कृबु उपकरणों का आँकड़ा सरकारी कृबु प्रणालियों के अलावा किसी और के साथ साझा नहीं कर सकती है। हालाँकि इनका उपयोग पक्षपाती अल्गोरिदम के खिलाफ होगा।

लेकिन यह तय करने में काफी वक्त जाया हो जायेगी कि कोई अल्गोरिदम पक्षपाती है या नहीं!

इतिहास गवाह है कि एक सदी पहले यूरोप ने दुनिया का नेतृत्व किया था और उसका कोई सानी नहीं था पर आज की दुनिया प्रौद्योगिकी आधारित है। कृत्रिम बुद्धिमता के क्षेत्र में एशिया और अमेरिका ने जो काम किया है, वह यूरोप के लिये गले में फँसी हड्डी है जहाँ वह अपने उपयोक्ताओं की निजता संरक्षण का मुद्दा उठाकर खुद को नैतिकता का बेताज बादशाह पेश कर रही है, जैसी वह जीडीपीआर के मामले में कर चुकी है।

हाल ही में, रिलायंस जियो ने हाप्टिक नामक वार्तालापी कृबु चैटबोट कंपनी का अधिग्रहण किया है। इस तरह के मामले में यूरो संघ इस तरह के मामले में भी दाँवपेंच फँसाकर अपना पल्ला झाड़ सकती है।

आज जीडीपीआर कानूनन रूप से उन सभी कंपनियों के लिये अनिवार्य है जो यूरोप में काम कर रही हैं या करना चाहती हैं। जीडीपीआर कानून यूरोपीय उपयोक्ताओं के डिजीटल अधिकारों की रक्षा करती है।

लेकिन एक चीज भूला दी गयी है कि अगर आप किसी क्षेत्र का नीति निर्धारण करना चाहते हैं, तब आपको उक्त क्षेत्र में नेतृत्व करना होगा और यहाँ यूरोप काफी पीछे दिखायी पड़ती है।

छवि स्त्रोत: Pexels

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