अब आप जीभ की मदद से दुनिया देख पायेंगे! (दिव्यांग विशेष*)

blind person wants to see the world through his eyesताज्जुब हो रहा है ना, शीर्षक पढ़कर!

लगना ही चाहिये क्योंकि हम आपके लिये एक ऐसी कहानी पेश कर रहे हैं जो आसानी से पचने वाली नहीं है।

पर यह हकीकत है और दुनिया में कुछ लोग हैं जो इसकी मदद से सफल जीवन जी रहे हैं। हम एक आविष्कार के बारे में बात करने वाले हैं जो दुनियाभर के 28.5 करोड़ अंधजनों के लिये जीवनदायिनी बन रही है।

इस आविष्कार पर विश्वास करना जितना मुश्किल है, उससे ज्यादा मुश्किल इसकी प्रक्रिया समझना है।

यहाँ ब्रेनपोर्ट नामक प्रौद्योगिकीय उपकरण का उपयोग किया गया है जिसे किसी की जीभ में लगाया जाता है। और यह उपकरण जिस चीज को छूती है, उसकी संवेदी सूचना हमारे दिमाग में पहुँचा देती है। इस उपकरण की मदद से लोग अपनी जीभ की मदद से देख पाते हैं।

हम कैसे देखते हैं:

हमारी आँखें किसी चीज को देखती है, तब वे उसकी उल्टी छवि मस्तिष्क को भेज देती है। फिर हमारी मस्तिष्क उस छवि को संसाधित करती है, जिसके बाद ही हमें कोई चीज वाकई दिखायी और समझ आती है।

वैज्ञानिक संवेदी प्रतिस्थापन की कई विधाओं पर काम कर रहे हैं जिससे अंधजन भी आम लोगों की तरह जिंदगी जी पायेंगे। वैज्ञानिक ऐसे उपकरण बनाने पर भी जोर दे रहे हैं जो प्रत्यक्ष तौर पर अंधजनों की मदद कर पायेगी।

हमारे पास एक और संवेदी प्रतिस्थापन उपकरण मौजूद है जिसका नाम भोएस (परिष्कृत नाम: vOICe) है जो चाक्षुक सूचना को ध्वनि में बदल देती है।

इन उपकरणों के आने से एक तथ्य सबल हो रही है कि हमारी मस्तिष्क हमारी सोच से भी कई गुना अधिक तेज है और वह हमारी पाँचों इंद्रियों से सटीक आँकड़ा मँगवा सकती है और उन्हें संसाधित करके हमारी मदद करने में सक्षम है।

आप उपरोक्त वीडियो की मदद से ब्रेनपोर्ट को समझ सकते हैं कि यह कैसे काम करती है। और यह कैसे आफके किसी सगे व्यक्ति की मदद कर पायेगी जिससे वे दुनिया को आपकी तरह ही देख पायेंगे।

छवि स्त्रोत: Pexels

क्या आप जानते हैं कि आपके द्वारा पढ़ा गया यह पोस्ट हजारों को प्रेरित करने वाली है? यदि इसका जवाब हाँ है तो आप अपने वही विचार यहाँ भी दे सकते हैं।

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