1 अप्रैल को इसरो चौकसी उपग्रह छोड़ेगी

space night with isro

आज हमारी देश मिशन शक्ति के साथ लोकसभा चुनावों के शोर में भी झूम रही है लेकिन देश की शीर्षस्थ अंतरिक्ष संगठन के पास फुर्सत की कमी हो गयी है।

और यह हो भी क्यों नहीं, जब इसरो देश को अंतरिक्ष महाशक्ति बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है।

वर्ष 2019 इसरो के साथ-साथ भारत के लिये भी बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि वह दो अतिमहत्वपूर्ण अभियान पर काम कर रही है जिसके तहत दो उपग्रह छोड़े जायेंगे।

इसरो कल यानि 1 अप्रैल को सुबह साढ़े 9 बजे एमीसैट अभियान लांच करेगी। इसके बाद चंद्रयान-2 की बारी आने वाली है। ये दो अभियान इसरो को प्रभुत्वशाली अंतरिक्ष एजेंसियों में से एक स्थापित कर जायेगी और इसरो को किसी अंतरिक्ष एजेंसी से कम आँकना एक बेवकूफी से कम नहीं होगी।

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इसरो कल एमीसैट अभियान लांच कर रही है। इसमें पीएसएलवी-सी45 का उपयोग होगा। इसमें एक चौकसी उपग्रह (आँग्ल: सर्विलांस) शामिल है जो डीआरडीओ की भागीदारी के साथ निर्मित है। इस उपग्रह के प्रक्षेपण के साथ भारत की संचार प्रणाली और रडार व्यवस्था (रक्षा प्रणाली पढ़िये) अधिक सशक्त हो जायेगी।

यह अभियान इसलिये भी महत्वपूर्ण है कि इस उपग्रह की मदद से वनक्षेत्र, बर्फीले क्षेत्र, तटीय क्षेत्रों जैसी अंजान जगहों में भी विद्युचुंबकीय (आँग्ल: इलैक्ट्रोमैग्नेटिक) तरंगों की पहुँच बढ़ जायेगी जो अंततः हमारी रक्षा प्रणाली को मजबूत करेगी।

एमीसैट 436 किग्रा भार वाली उपग्रह भारतीय मिनी सैटेलाइट (आईएमएस-2) बस मंच पर आधारित है जिसका उद्देश्य विद्युचुंबकीय वर्णपट्ट मापन है।

इस अभियान के साथ इसरो एक कीर्तिमान रचने जा रही है। इसरो इस अभियान के तहत तीन भिन्न कक्षाओं में उपग्रहों को प्रक्षेपित करेगी। एमीसैट पृथ्वी सतह से 749 किमी दूर प्रक्षेपित होगी। इसके साथ 28 अन्य उपग्रह भी सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपित किये जायेंगे जो विदेशी देशों के हैं।

ये 28 उपग्रह लिथुआनिया, स्पेन, स्विट्जरलैंड और अमेरिका के हैं जिनके लिये वाणिज्यिक करार किया गया है। इनमें से 24 अमेरिका के, 2 लिथुआनिया के, 1-1 स्पेन और स्विट्जरलैंड के हैं जो पृथ्वी सतह से 504 किमी दूर प्रक्षेपित होगी।

तीसरी कक्षा एक मंच के तौर पर आरक्षित रहेगी जिसका उपयोग अनुसंधान और अकादमिक संस्थानों हेतु होगी। इस बार इंडियन इंस्टीट्यूट ओफ स्पेस साइंस एंड टेक्नोलोजी की तरफ से एडवांस्ड रिटार्डिंग पोटेंसियल एनालाइजर फोर आयनोस्फेरिक स्टडीज या संक्षेप में एरिस भी प्रक्षेपण में शामिल हो रही है।

यदि आप अंतरिक्ष विज्ञान में दिलचस्पी रखते हैं तो इसरो की आधिकारिक सजाल पर इसका प्रक्षेपण लाइव देख सकते हैं। इसरो इसका प्रक्षेपण अपनी सजाल पर लाइवस्ट्रीम करेगी।

छवि स्त्रोत: Pexels

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