फ्लिपकार्ट को क्यों नहीं भूला जाये!!

BENGALURU, INDIA: Outside view of Flipkart office shot on October 01, 2015 in Bengaluru, India. (Photo by Hemant Mishra/Mint via Getty Images)

जबभी भारत में इस बात की चर्चा होती है कि चलो, आज ओनलाइन कुछ खरीदा जाये तो लोग फ्लिपकार्ट से सामान खरीदने लिये फ्लिपकार्ट की आधिकारिक एप या www.flipkart.com पर पहुँच जायेंगे।

जबभी भारत में उद्यमिता पर बहस होगी तो फ्लिपकार्ट को अग्रणीतम खिलाड़ी के तौर पर पेश करने में किसी को गुरेज नहीं होगा!

क्योंकि सचिन बंसल और बिन्नी बंसल ने फ्लिपकार्ट नामक सिर्फ एक वेबसाइट ही नहीं बनाया जिसकी मदद से उन्होंने कुछ हजार-करोड़ रुपये बनाये या नाम-शोहरत कमाया। फ्लिपकार्ट संस्थापकों ने देश में स्टार्टप यानी कंपनी शुरु करने हेतु एक ऐसा माहौल बनाया जब मंदी की लहर चल रही थी।

वह दौर था 2007 का, जब आईआईटी दिल्ली के दो छात्र कुछ नया करने की ठानते हैं। फ्लिपकार्ट 2-बीएचके प्लैट से शुरु हुयी थी और आज देश के 30 हजार (2016 के अनुसार) से भी अधिक लोग इसकी छतरी में बसेरा लिये हुये हैं। फ्लिपकार्ट इस बात का अकाट्य प्रमाण है कि अगर आप जिद कर लेते हैं कि आप कुछ हासिल करके ही रुकेंगे, तो आप वाकई हासिल कर ही लेते हैं।

और यही हुआ फ्लिपकार्ट के साथ!

दोनों बंधुओं ने मेहनत-पसीना बहाकर फ्लिपकार्ट को इतना बड़ा बनाया कि आज ईकोमर्स में इनका कोई सानी नहीं है। दोनों हिंदी फ्लिम करण अर्जुन के किरदार करण और अर्जुन की तरह एकदूसरे के लिये काम करते रहे और धीरे-धीरे आगे बढ़ते गये।

अक्तूबर 2007 में स्थापना के बाद, रोजाना 100 ओर्डर मिल रही थी। शुरुआत में किताबें बेचने पर ज्यादा ध्यान दिया गया और बंगलुरुस्थ लुलु.कोम और वीरीड का अधिग्रहण किया गया। कुछ और स्टार्टपों का भी अधिग्रहण किया गया जो असफल हो गयी।

और फिर, 2012 में वह पल आया जो कंपनी के गेमचेंजर साबित हुयी।

फ्लिपकार्ट ने लेट्सबाय नामक ओनलाइन इलेक्ट्रोनिक्स रिटेलर का अधिग्रहण किया। इसके बाद कंपनी ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। 2014 में, कंपनी ने ओनलाइन फैशन रिटेलर मिंत्रा को ₹2000 करोड़ में खरीद लिया। हालाँकि मिंत्रा स्वतंत्र रूप से काम करती है और फैशन पर अपना पूरा व्यवसाय केंद्रित किये हुये है।

कहते हैं ना कि हर व्यवसाय में एक पल आती है जब आपको तय करना होता है कि आप करना चाहते हैं कि नहीं, ताकि आप वो चीज जल्दी हासिल कर लेंगे, जिसके लिये आप सालों से दौड़धूप कर रहे हैं।

फरवरी 2014 में, कंपनी ने मोटोरोला मोबिलिटी के साथ भागीदार किया जिसके तहत वह मोटो जी स्मार्टफोन की एक्सक्लूसिव भारतीय रिटेलर बन गयी। यह भागीदारी मोटो ई स्मार्टफोन के साथ भी दोहरायी गयी। कई दफा फ्लिपकार्ट सजाल सिर्फ इसलिये काम नहीं कर रही थी क्योंकि इसकी सजाल पर जरूरत से ज्यादा लोग खरीदारी करने आ गये थे।

इसके बाद कंपनी ने अन्य स्मार्टफोन कंपनियों के साथ भी गठजोड़ करके उनके स्मार्टफोन को एक्सक्लूसिव तौर पर अपनी सजाल पर बेचा। जुलाई 2014 में, शाओमी एमआई3 की 10,000 हैंडसेट सिर्फ 5 सकेंड में बिक गयी थी। इसी वर्ष, कंपनी ने दीपावली और कंपनी सालगिरह के उपलक्ष्य में 6 अक्तूबर को बिग बिलियन डे नामक सेल का आयोजन किया जिसमें सिर्फ 10 घंटे में ₹600 करोड़ की धमाकेदार बिक्री हुयी।

मार्च 2015 में, कंपनी ने निर्णय लिया कि अब मोबाइल उपयोक्ता केवल फ्लिपकार्ट एप से सामान खरीद पायेंगे। हालाँकि बाद में बेहतर सुविधा प्रदान करने लिये फ्लिपकार्ट लाइट वेबसाइट और एप लांच किया गया।

2016 में, ईकोमर्स बाजार की विकास दर में अचानक गिरावट देखी गयी जिसकी वजह से फ्लिपकार्ट को कुछ मुसीबतों का सामना करना पड़ा। इसके अलावा अमेजन भारत भी अपनी आक्रामकता दिखा रही थी। हालाँकि कंपनी ने इस चरण को पार करते हुये स्वयं को लाभदायक बनाये रखा।

कंपनी इन बीते सालों में भेंचर फर्मों से धन इकट्ठा करती रही और अपनी परियोजनाओं में लगाती गयी। यह एक सनक की तरह है कि तब वे वही कर रहे थे, जब उन्हें अच्छा लग रहा था, बिना इसकी परवाह किये कि कोई क्या बोलेंगे। बतौर संस्थापक, आप यही तो करते हैं!

2018 में, 4 मई को एक खबर उभरकर आयी कि अमेरिकी रिटेल दिग्गज वालमार्ट इसे खरीदने जा रही है और वह कंपनी में अहम प्रशासनिक अधिकार भी रखेगी। गौरतलब है कि इस दौड़ में अमेजन भारत भी थी पर वह रकम की दौड़ में पीछे रह गयी।

इस खबर की पुष्टि होने के बाद सचिन बंसल ने कंपनी छोड़ दिया। उन्होंने अपना बचा हिस्सा भी वालमार्ट को बेच दिया।

फ्लिपकार्ट-वालमार्ट सौदा 18 अगस्त 2018 को संपन्न हो गयी।

फिर 13 नवं 2018 को खबर आयी कि तत्कालीन सीईओ बिन्नी बंसल ने कंपनी बोर्ड से इस्तीफा दे दिया है। यह आरोप व्यक्तिगत था जिसके समर्थन में आजतक कोई सबूत नहीं मिली है।

यहाँ एक बात गौर करने लायक है कि इंसान सबसे पहले अपना फायदा देखते हैं, चाहे वे किसी भी देश से ताल्लुक रखते हैं। वे अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिये पूरी जद्दोजहद करते हैं जिससे उनका यश बढ़ जाये।

और इसके मामले में भी यही हुआ।

सबसे पहले निवेशकों ने फ्लिपकार्ट को उतना चूसा, जितना चूस सकते थे। फिर, उसे दूसरी बड़ी निवेश कंपनी को बेच दिया। और फिर जो हुआ, आप पढ़ चुके हैं।

लेकिन इसके साथ एक चीज और सीख सकते हैं आप अगर आप वाकई व्यवसायी बनना चाहते हैं, और वहभी रिलायंस, आदित्य बिड़ला, टाटा जैसी, तो आप एक बात हमेशा ध्यान में रखियेगा कि खुद इतना हुनरमंद बन जाइये कि आपके सामने कोई दूसरा टिक न पाये। फ्लिपकार्ट के सचिन और बिन्नी के मामले में भी यही हुआ!

बंसल बंधु एक वक्त के बाद आराम मोड में चले गये और जितना सीखा, उतने पर अमल करके कंपनी को बड़ी कर दिये और फिर सीखना बंद कर दिये। जब आप सीखना बंद कर देते हैं, तब क्या होता है?

कोई दूसरा व्यक्ति आपकी जगह हथियाने की कोशिश करते हैं और पहली…दूसरी…तीसरी बार में वो व्यक्ति सफल हो ही जाते हैं क्योंकि उन्होंने खुद को आपसे बेहतर बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ा और अंत तक उस यज्ञ में जुटे रहे कि आपको पीछे करके खुद को पदस्थापित करने के बाद ही साँस लेंगे

एक बात हमेशा याद रखियेगा कि कंपनी महान इसीलिये नहीं होती है कि उसके पास कुछ संपत्तियाँ या करोड़ों के बांड हैं, बल्कि इसलिये महान होती है क्योंकि उसके पास आपके जैसे संस्थापक (सदस्य) हैं। और जब आप किसी कंपनी के संस्थापक बनते हैं, तब कंपनी संस्कृति आपसे शुरु होती है और आप ही पर जाकर खत्म हो जाती है।

महान कंपनी बनाने लिये बंसल बंधुओं ने जीतोड़ मेहनत किया पर आज दुनिया उन दोनों को सिर्फ फ्लिपकार्ट संस्थापक के तौर पर याद करेगी, नाकि बतौर कार्यकारी अध्यक्ष या प्रबंधक। इसीलिये जीतोड़ मेहनत कीजिये, इतना कीजिये कि आपका कोई प्रतिद्वंद्वी आपके सामने खड़े होने की जुर्रत न कर पाये।

अंत में, एक चीज जोड़ेंगे कि फ्लिपकार्ट ने खुद को ऐसी कंपनी के तौर पर पेश किया जो भारतीय ईकोमर्स (तकिंदी: अनुवाणिज्य) की जननी है, जिसने भारत के घर-घर तक सस्ता, भरोसेमंद उत्पाद पहुँचाया और वह भी आकर्षक तरीके से (ओनलाइन पढ़िये)।

इसके साथ फ्लिपकार्ट ने भारत में स्टार्टप संस्कृति की भी शुरुआत किया जिसकी राह पर चलते हुये अनेक लोग सफल हो चुके हैं और इस राह के एक राही हम भी हैं।

विशेष: यह आलेख फ्लिपकार्ट विकिपीडिया की मदद से लिखी गयी है। हम सचिन बंसल और बिन्नी बंसल के आभारी हैं कि उन्होंने भारतीयों के लिये एक उदाहरण पेश किया कि हमलोग उभरती अर्थव्यवस्था के साथ तालमेल रखते हुये नवोन्मेष और नवाचार को बढ़ावा देकर अपनी जिंदगी को अपने हिसाब से डिजाइन कर सकते हैं।

छवि स्त्रोत: Getty Images & Mobiletor

 

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