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गूगल की पुष्टि, टेलीग्राम पर प्रतिबंध की वजह से रूस में उसकी सेवायें भी अवरुद्ध हो रही है

 

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रूसी नियामक रोसकोम नादजोर ने टेलीग्राम कंपनी की सेवा को अवरुद्ध कर दिया है। ऐसी कार्रवाई नियामक ने तब किया है जब कंपनी ने अपनी संदेशी सेवा में उपयोग होने वाली इन्क्रिप्शन कुंजियों को उसके साथ साझा करने से मना कर दिया है।

टेकक्रंच के हवाले से खबर है कि रूस में करीबन 1.8 करोड़ आईपी (अंतर्जाल उपसंधि) पते पर लोग अंतर्जाल का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं और यह टेलीग्राम को अवरुद्ध करने का परिणाम प्रतीत होती है।

और अब, गूगल ने टेकक्रंच को पुष्ट किया है कि उसकी सेवा भी इसके चपेटे में आ गयी है। इसका मतलब यही है कि रूस में गूगल की गूगल खोज, जीमेल और एंड्राएड एपों पर आने वाली अधिसूचनायें तक इससे प्रभावित हो रही हैं। ऐसा इसीलिये हो रहा है कि जो उपयोक्ता अपने एंड्राएड स्मार्टफोन पर टेलीग्राम एप का उपयोग करते हैं, वही गूगल सेवाओं का उपयोग करने से वंचित हो रहे हैं।

रूसी नियामक ने खुद फेसबुक पर टिप्पणी करते हुये कहा है कि उसकी आईपी अवरोध के कारण गूगल सेवायें भी कुप्रभावित हो रही हैं। इसके साथ उन त्रिपक्षीय सेवाओं को भी सेवा से बाहर कर दिया गया है जो गूगल क्लाउड और अमेजन की अमेजन वेब सर्विसेज का उपयोग करते हैं। इनमें ट्विच और स्पोटिफाई जैसी कंपनियाँ शामिल हैं।

रूस अपनी भोगौलिक सीमा में ऐसी कई डिजीटल सेवाओं को अवरुद्ध कर रही है जो उसकी नीतियों का 100 टका अनुपालन नहीं करते हैं।

भी सिक्युरिटी के सह-संस्थापक और सीओओ इलिया अंद्रीव के अनुसार, रूसी नियामक के फैसले के बावजूद 20 लाख लोग उसकी छद्म (आँग्ल: प्रोक्सी) सेवा के जरिये इस प्रतिबंध को धता बताकर टेलीग्राम एप का उपयोग कर रहे हैं। हालाँकि यह आँकड़ा बहुत छोटी दिखायी पड़ती है जहाँ देश में टेलीग्राम के 1.4 करोड़ उपयोक्ता हैं। और इस मुफ्त प्रचार की वजह से नये लोग भी इसकी सेवाओं का उपयोग करने के लिये प्रोत्साहित हो रहे होंगे।

टेकक्रंच के अनुसार, टेलीग्राम को अवरुद्ध करने के पीछे अहम वजह यह है कि वह ऐसी तरकीब अपना रही है जो रूसी नियामक द्वारा कोई आईपी पता अवरुद्ध होने पर दूसरी आईपी पते में तब्दील हो जाती है। इस तरकीब का उपयोग जेलो एप करती थी जो करीब 1 साल से रूसी प्रतिबंध का दंश झेल रही है।

नियामक टेलीग्राम और बाकी अंतर्जाल कंपनियों के साथ रस्साकशी खेल रही है जो किसी भी तरह से उसकी नियमों को मानने से इन्कार करना चाहते हैं। और यह रूस की अंतर्राष्ट्रीय छवि में बट्टा लगा रही है। ऊपर से, अगर गूगल की सेवायें रूस में नहीं चलेंगी तो इसी जून-जुलाई महीने में आयोजित होने वाली विश्व कप के दौरान आने वाले पर्यटकों को यही संदेश मिलेगी कि गूगल रूस में काम नहीं करती है

छवि स्त्रोत: Pixabay

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