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फेसबुक पर विज्ञापनदाताओं द्वारा उपयोक्ता सहमति लेना जरूरी होगा

facebook logo on a colorful smartphone

फेसबुक अपने मंच पर कई बदलाव कर रही है जिससे वह अपनी किरकिरी कम करवाने में कामयाब हो सकती है। हालिया समय में फेसबुक कैंब्रिज एनालिटिका मामले में बुरी तरह फँसी हुयी है जिससे वह बाहर नहीं निकल पा रही है और हर दिन नयी कारनामों से परिचित हो रही है।

अब इस किश्त में फेसबुक एक सर्टिफिकेशन (प्रमाणन) औजार लांच करने जा रही है जो सुनिश्चित करेगी कि विज्ञापनदाता अब उन्हीं ईमेल पते पर विज्ञापन भेज सकेंगे जो उपयोक्ताओं की सहमति द्वारा हासिल किये गये हैं।

इसे टेकक्रंच द्वारा पहली बार देखा गया जिसका नाम कस्टम ओडियंस सर्टिफिकेशन औजार है। “विज्ञापनदाताओं को बताना होगा कि उन्होंने कोई आँकड़ा अपलोड करने से पहले उचित उपयोक्ता सहमति ले लिया है”, उसमें लिखा गया है।

फेसबुक ने टेकक्रंच को बताया कि इसके जरिये व्यापारिक खातों के पास फेसबुक उपयोक्ताओं के आँकड़े कम संख्या में पहुँचेगी। और विज्ञापनदाताओं व डिजीटल एजेंसियों को प्रमाणित करना होगा कि उनके पास उपयोक्ता आँकड़ा उपयोग करने की अनुमति है।

पिछले सप्ताह फेसबुक ने उद्घोषणा किया था कि अगले आदेश तक नये एप उसके मंच पर शामिल नहीं हो पायेंगे। यह बदलाव कैंब्रिज एनालिटिका प्रसंग से संबंधित है जहाँ कैंब्रिज एनालिटिका ने त्रिपक्षीय एप दीसइजयोरडिजीटललाइफ के जरिये उपयोक्ताओं के आँकड़ों का दुरुपयोग किया था।

फेसबुक की ऐसी कोशिशें उसे मुश्किलों के भँवर से दूर तो नहीं करेगी लेकिन उपयोक्ताओं के बीच विश्वसनीयता बनाये रखने के लिये उसे कड़ा कदम उठाने की तत्काल जरूरत है। और ऐसे में आपको भी समझना चाहिये कि आप फेसबुक का उपयोग मुफ्त में कर रहे हैं, तो कंपनी करोड़ों कैसे कमा रही है?

वह आपके आँकड़ों को दूसरी कंपनियों के साथ साझा करती है जो आपकी पसंदगी के हिसाब से आपको विज्ञापन दिखाते हैं और आप भी उसकी भीड़ में शामिल होकर उनके पोस्ट को पसंद या साझा करते दिखायी पड़ते हैं!

छवि स्त्रोत: pexels

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