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अध्ययन का खुलासा, लोग आईओएस से अधिक एंड्राएड के प्रति निष्ठावान हैं

एक अनुसंधान संस्था कंज्यूमर इंटेलीजेंस रिसर्च पार्टनर्स (सिर्प) के अध्ययन से खुलासा हुआ है कि एंड्राएड उपयोक्ता अपने ब्रांड के प्रति आईओएस उपयोक्ताओं से अधिक निष्ठावान हैं। टेकक्रंच की रिपोर्ट कहती है कि 2016 पूर्वार्द्ध से एंड्राएड निष्ठा न सिर्फ बढ़ रही है बल्कि यह अबतक के उच्चतम स्तर पर पहुँच गयी है।

यह अनुसंधान अमेरिकी उपयोक्ताओं पर किया गया है लेकिन इसमें कोई शक नहीं है कि दुनियाभर में एंड्राएड उपयोक्ताओं की संख्या दिनोंदिन बढ़ रही है। एपल की प्रतिलिप्यधिकारित आईओएस के बजाय कई वैश्विक मोबाइल विनिर्माता एंड्राएड की मुक्तस्त्रोत वातावरण का उपयोग करके एंड्राएड आधारित नये मोबाइल फोन रोज लांच कर रहे हैं।

हर मंच पर वर्तमान निष्ठा मापने के लिये, अध्ययन ने अमेरिकी ग्रहकों की प्रतिशत को ध्यान में रखा जो अपने फोन को उन्नयित (अपग्रेड) करके 2017 में मौजूदा ओपरेटिंग सिस्टम पर रह गये। उनमें से 91 प्रतिशत लोग एंड्राएड के साथ थे और 86 प्रतिशत लोग आईओएस के साथ रह गये।

माइक लेविन, सिर्प के भागीदार एवं सह-संस्थापक ने टेकक्रंच को कहा कि “इस वक्त इन दो मोबाइल ओपरेटिंग सिस्टम में, उपयोक्ता कोई एक चुनते हैं, सीखते हैं, एपों तथा भंडारण में समय व्यतीत करते हैं और फिर उनका उपयोग करते रह जाते हैं।”

आईओएस और एंड्राएड की ब्रांड निष्ठा में पिछले कुछ सालों में काफी बदलाव देखने को मिला है। 2013 में, आईओएस उपयोक्ता अपने ब्रांड के प्रति अधिक निष्ठावान थे लेकिन जनवरी 2016 से दिसंबर 2017 तक, एंड्राएड के प्रति निष्ठा 89% से 91% थी जबकि इसी अवधि में आईओएस निष्ठा 85% से 88% थी।

हालाँकि, सिर्प का कहना है कि यह दर एक ओपरेटिंग सिस्टम से दूसरे में स्विच कर रहे लोगों की संख्या से अलग है। एंड्राएड के पास आईओएस से अधिक ग्राहक आधार है इसीलिये आईओएस से एंड्राएड पर जाने वाले लोगों की संख्या एंड्राएड से आईओएस पर जाने वाले लोगों की संख्या के बराबर या उससे ज्यादा है।

इसपर लेविन का कहना है, “इस पद्धति से उपयोक्ताओं की पूर्ण संख्या इस बात को पुख्ता कर रहे हैं कि एंड्राएड के पूर्व-उपयोक्ता आईओएस के प्रति अधिक वफादार हो रहे हैं और एंड्राएड आईओएस के पूर्व-उपयोक्ताओं को अपनी ओर खींचने में थोड़ी अधिक समय लेगी।”

छवि स्त्रोत: pexels.com

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