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सोफ्टबैंक और सऊदी अरब 20 हजार करोड़ की सौर परियोजना पर काम करेंगे

softbank with saudi arab crown prince

सोफ्टबैंक समूह अपने अद्भुत निवेशों के लिये जानी जाती है और इसकी अगली कड़ी में उसने सऊदी अरब के साथ एक एमओयू (समझौता) किया है जिसके तहत वह $200 बिलियन (20 हजार करोड़) कीमत की सौर ऊर्जा संयंत्र का निर्माण करेगी।

यह सौर संयंत्र 2030 तक 200 गीगावाट क्षमता हासिल कर लेगी जो दुनिया के लिये एक नायाब उदाहरण साबित होने वाली है।

ब्लूमबर्ग के अनुसार, सऊदी अरब की यह परियोजना दुनिया की किसी भी प्रस्तावित परियोजना से 100 गुणा से अधिक बड़ी है। अस्ट्रेलिया में 2 गीगावाट की सौर परियोजना 2023 तक पूरी होने की उम्मीद है।

अमेरिकी शहर न्यूयार्क में एक आयोजन के दौरान सऊदी राजकुमार मोहम्मद बिन सलमान साथ सोफ्टबैंक के माशायोशी सन उपस्थित थे। माशायोशी ने कहा कि यह परियोजना एक लाख नौकरियाँ पैदा करेगी और सऊदी अरब की विद्युत उत्पादन क्षमता को तिगुना कर देगी। इसके साथ उन्होंने जोड़ा कि इससे शक्ति व्यय में $40 बिलियन की बचत होने की भी उम्मीद है।

सऊदी दुनिया में कच्चे तेल की सबसे बड़ी निर्यातक है लेकिन वह अब अपनी अर्थव्यवस्था को तेल से दूर करके विविध बनाने की ओर अग्रसर हो रही है।

2011 में फुकुशिमा परमाणु संयंत्र के हादसे के बाद सोफ्टबैंक स्वच्छ ऊर्जा में एक-से-एक निवेश में हाथ डाल रही है। सोफ्टबैंक मंगोलिया में सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश कर रही है। इसके साथ वह एशिया सुपर ग्रिड में भी निवेश कर रही है जिसे जापान, चीन, दक्षिण कोरिया और रूस का समर्थन हासिल है।

सोफ्टबैंक ऐसी परियोजनाओं से खुद को भविष्य का ऐसा सितारा बनाना चाहती है जिसकी रोशनी कभी धुंधली नहीं होगी। और ऐसी सौर परियोजनायें भविष्य के लिये भी बेहद जरूरी है जहाँ कोयला और पेट्रोलियम के कारण प्रदूषण का अंबार खड़ा हो चुका है।

छवि स्त्रोत: Bloomberg

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