Ananya, ISRO

मप्र, महा, छग में पर्यावरणीय आपदा से निपटने को इसरो की जीआईएस पोर्टल का उपयोग अब महा निगम करेगी

ISRO MSETCL GIS APP

सिद्धार्थ बर्णवाल @Siddhu_Tak

इसरो ने एक वेब-आधारित जीआईएस (भूसूचना प्रणाली) पोर्टल का विकास किया है जो मध्य भारत के मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ एवं महाराष्ट्र में पर्यावरणीय आपदा से निपटने के लिये सुदूर संवेदी अनुप्रयोगों का इस्तेमाल करती है। इस पोर्टल का औद्योगिक उपयोग अब महाराष्ट्र की विद्युत कंपनी कर रही है।

इसरो की नागपुर स्थित मध्य प्रादेशिक सुदूर संवेदन केंद्र ने अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का उपयोग करते हुए क्षेत्र की संसाधन एवं पर्यावरणीय समस्‍याओं से निपटने हेतु इस भूसूचना प्रणाली का विकास किया है। इस भूसूचना प्रणाली को वेब-आधारित बनाने में महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड, मुंबई ने मदद दिया है।

महा कंपनी इस वेब-आधारित पोर्टल की मदद से वितरण लाइनों एवं उपकेंद्रों की वृहद नेटवर्क की निगरानी कर सकती है। इससे महाराष्ट्र राज्य में फैले उपकेंद्रो, लाइनों, टावरों जैसी विद्युत अधोसंरचना के आँकड़ों को संग्रहित तथा संगठित करने में और उनसे जुड़े निर्णय लेने में सहायता मिलेगी।

इस पोर्टल की मेजबानी भुवन सर्वर से हो रही है और महा कंपनी के कर्मचारी इस पोर्टल से मोबाइल उपकरणों (स्मार्टफोन, टैबलैट, आदि) के जरिये जुड़े हुये हैं। इस पोर्टल में मानदंडों के आधार पर उपकेंद्रों का चयन किया जाता है, जैसे वोल्टेज स्तर, प्रशासनिक सीमा स्तर, आदि।

इस वेब-आधारित भूसूचना प्रणाली की मदद से कंपनी के पदाधिकारी विभिन्न चयन मानदंडों के आधार पर रिपोर्ट सृजित करते हैं जिनमें भूस्थानिक विश्लेषण के आँकड़े मौजूद रहते हैं।

MSETCL web application-sub station Akolaइस पोर्टल को अधिक मजबूत बनाने के लिये भविष्य में निकट वास्तविक समय आँकड़ा विश्लेषण का उपयोग करके संवर्धित पैट्रोलिंग सूचना प्रणाली का बेहतर निष्पादन किया जा सकेगा।

आप इसरो की इस पृष्ठ पर पूरी लेख पढ़ सकते हैं।

छवि स्त्रोत: इसरो

 

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