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यूरोपीय संघ ब्रिटेन को गैलिलियो परियोजना से बाहर कर सकती है

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जब से ब्रिटेन (आधिकारिक नाम: यूनाइटेड किंगडम) यूरोपीय संघ से अलग हुयी है, तब से ये दोनों हर स्तर पर बँटे दिखायी दे रहे हैं। और अब यह बँटवारा अंतरिक्ष तक पहुँच चुकी है।

वर्ज की खबर के अनुसार, यूरोपीय संघ अपनी महत्वकांक्षी परियोजना गैलिलियो से यूके को बाहर कर सकती है। गैलिलियो परियोजना के तहत 30 उपग्रह प्रक्षेपित होंगे जो अमेरिका-नियंत्रित जीपीएस (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) का तोड़ बनेंगे। इससे यूरोप (ब्रिटेन+) वैश्विक नौचालन में आत्मनिर्भर बन सकते हैं।

जीपीएस की तरह, गैलिलियो उपग्रह करोड़ों उपकरणों पर नेविगेशन और मानचित्र संबंधी आँकड़े मुहैया करायेंगे जिनमें उपभोक्ता उत्पादों के साथ सैन्य विमान भी शामिल हैं।

खबर के अनुसार, ब्रिटिश कंपनियों को गैलिलियो परियोजना से जुड़े कामों से बाहर किया जा सकता है और ब्रिटिश सेना इस परिजना का लाभ नहीं ले पायेगी। यह परियोजना यूके के लिये जरूरी है जो जीपीएस के बदले ऐसी संरचना चाहती है जो रणनीतिक रूप से सार्थक होने के साथ वाणिज्यिक महत्ता भी देगी।

लेकिन यूरोपीय संघ की भावी योजना से ब्रिटेन की वांतरिक्ष (एयरोस्पैस) उद्योग को गहरा झटका लग सकता है जो उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिये भी चिंता का सबब बन सकती है।

यूरोपीय संघ का कहना है कि यूके उसके साथ एक सुरक्षा समझौता करने वाली है और वह गैलिलियो परियोजना का हिस्सा नहीं बन सकती है क्योंकि ऐसा करने से प्रणाली की कई संवेदनशील आँकड़े यूरोप से बाहर आयेंगे। और इसका उपयोग केवल यूरोपीय सदस्य कर सकते हैं।

इसी बीच ब्रिटिश सरकार गैलिलियो का हिस्सा बने रहने का तोड़ ढूँढ रही होगी।

छवि स्त्रोत: thefrontierpost.com

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