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इस ब्राउजर के साथ निजी ब्राउजिंग अधिक निजी हो सकती है

यदि आप अंतर्जाल पर कोई चीज खंगालने के बाद दुविधाग्रस्त रहते हैं कि आपकी सूचनायें गाहे-बगाहे किसी और के हाथों तक पहुँच रही है, बिना आपकी मंजूरी के। हालाँकि निजी ब्राउजिंग आने के बाद इस दुविधा में थोड़ी कमी मानी जा सकती है पर आपकी अंतर्जाल सेवा प्रदाता और कुछ अन्य संस्थायें फिरभी आपकी ब्राउजिंग सहित सभी सूचनाओं की निगहबानी कर सकते हैं।

अब आपके लिये बाजार में एक नयी ब्राउजर आयी है जो इस गुमनाम ब्राउजिंग को एक स्तर ऊपर ले जाने के लिये इच्छुक दिखती है। इसका नाम भेइल (आँग्ल: Veil Browser) है जो किसी भी अज्ञात ब्राउजिंग पद्धति की तुलना में आप जिस पृष्ठ को देख रहे होते हैं, उसे हमलावरों से ही नहीं, बल्कि आपके उपकरण की ऑपरेटिंग सिस्टम से भी उन चीजों को छिपा रही होती है। भेइल का शाब्दिक अर्थ हिंदी में घुंघट है।

इस ब्राउजर पर एमआईटी शोधार्थियों की एक दल काम कर रही है जिन्होंने 22 फरवरी को प्रकाशित नयी शोधपत्र में इस सेवा की रूपरेखा प्रस्तुत किया। इसमें कहा गया है कि यह टोर ब्राउजिंग से भी अधिक शक्तिशाली है जो आपके उपकरण पर रैम या अल्पकालिक भंडारण (अस्थायी स्टोरेज) में आपकी ब्राउजिंग इतिहास को मिटा देती है।

जब आप किसी पृष्ठ पर जाते हैं, चाहे आप गुमनाम होकर ही क्यों न जाये, उस पृष्ठ और उसकी अवयवों को मेमोरी (स्मृति) में भारित होने के बाद दिखाया जाता है जिसके बाद उसे कैशे करके उसे संशोधित भी किया जा सकता है। ब्राउजर इन्हें हटाने का प्रयास कर सकती है लेकिन यह अंतर्जाल जुड़ाव (इंटरनेट कनेक्शन) की स्थापित आधार पर भी निर्भर करती है। आपकी भूतिया गतिविधि आपके रैम में जीवंत रह सकती है, किसी डाटा या टाइमस्टैंप की हैश संचिका की वजह से भी।

एमआईटी स्नातक विद्यार्थी फ्रैंक वांग ने कहा:

ब्राउजरों की बुनियादी समस्या यही है कि वे सूचना संग्रह करते हैं और फिर उन्हें ठिकाने लगाने का भरसक प्रयत्न करते हैं पर अंत में होता यही है कि ब्राउजर फिर सूचना संग्रह में लग जाती है। और ऐसा हम एवं हमारी ब्राउजर अपनी तरफ से नहीं करना चाहेंगे।

फ्रैंक इस पत्र के मुख्य लेखक हैं।

भेइल सजाल की सुपुर्दगी (डिलीवरी) से निपटने के लिए कुछ कदम उठाती है। यहाँ एक ऐसी सर्वर (परोसक) है जो अंधे व्यक्ति की तरह हर सामग्री को बिना नजर गड़ाये जाने देती है। जब आप ब्राउजर में कोई यूआरएल डालते हैं, तब आपके लिए उक्त पृष्ठ को इन विशेष सर्वरों के द्वारा बीच में कहीं पर और आपके ब्राउजर कैशे में एन्क्रिप्ट (कूटलेखित) कर दिया जाता है, और केवल आपको दिखाने के लिए डिक्रिप्ट किया जाता है। कड़ियाँ (लिंक) और यूआरएल एन्क्रिप्ट रहते हैं इसीलिये उन्हें अनुरोध की गयी सामग्री (खोजी शब्द) के साथ जोड़ना आसान नहीं रहता है।

इसके अलावा, यह उक्त पृष्ठ में अदृश्य कचरा कोड भी डाल देती है जिससे आप उस पृष्ठ पर कितनी बार भी रिफ्रेश बटन दबा लीजिये, वह सामग्री आपको वैसी ही दिखेगी लेकिन उसकी विभिन्न डिजीटल जानकारी भिन्न हो जायेगी, जैसे हैश कोड, पैलोड आकार, आदि।

इस तरह, आपकी कंपूटर वास्तविक यूआरएल पंजीकृत नहीं कर पाती है, आँकड़ों को कैशे नहीं कर पाती है और ऐसा कुछभी नहीं छोड़ती है जो किसी आँकड़ी (डाटाबेस) से मिलान करने में सक्षम होगी।

चरम निजता मामलों में, आप वास्तविक वेबपृष्ठ को नहीं देख रहे होंगे – उसकी एक छवि देख रहे होंगे।

शोधार्थियों के अनुसार, वेबपृष्ठों को भेइल के हिसाब से परिवर्तित करने के लिये एक विशेष कंपाइलर (अका संकलक) का उपयोग किया जायेगा। यह बैंडविड्थ और अनुरोधों में जरूरी बदलाव करेगी जो आपकी ब्राउजिंग को अधिक संरक्षित बनायेगी।

लेकिन रुक जाइये, और भी बहुत कुछ है! आप में से जो अभीभी चिंतित हैं कि यह भी महासुरक्षित ब्राउजिंग के लिये अपर्याप्त है तो इसमें एक विकल्प दिया गया है जो है: चाक्षुक आँकड़ों के माध्यम से ब्राउजिंग

यदि आप चाहते हैं तो भेइल आपको लक्षित वेबपृष्ठ की कोड दिखाने के बजाय उसका स्क्रीनशोट (चाक्षुक डाटा) लेकर आपको दिखायेगी। जब आप उस स्क्रीनशोट में कहीं पर क्लिक करेंगे तो वह उक्त क्लिक की स्थान के अनुसार आपको दोबारा एक स्क्रीनशोट दिखा देगी।

बेशक, यह एक शून्य-विश्वास की स्थिति नहीं है: स्वयंसेवक और संगठन टोर सर्वरों की तरह इन अंधी सर्वरों को भी चला सकते हैं जिनमें से कुछ प्रणाली में हेरफेर कर सकते हैं लेकिन यदि प्रक्रिया गणितीय और प्रक्रियात्मक रूप से सत्यापनीय रहेगी, तब आप आश्वस्त रह सकते हैं। हालाँकि, सुरक्षा शोधार्थी इन कोडों का निरीक्षण जरूर करना चाहेंगे।

भेइल को इसी सप्ताह सैन डियागो स्थित नेटवर्क एवं डिस्ट्रिबुटेड सिस्टम्स सिक्युरिटी सिम्पोसियमिन में प्रस्तुत किया गया था। आप यहाँ पूरी पत्र पढ़ सकते हैं।

छवि स्त्रोत: mit.edu

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