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हावड़ा पुल हुयी 75 साल की, टाटा ने भी याद करके अपना समर्पण देश के प्रति जताया

हावड़ा पुल को देखकर सभी मोहित हो जाते हैं। लाखों पदयात्रियों के लिये यह वरदान से कम नहीं है पर इस बार फलसफां अलग है।

howrah-bridge_हिंदुस्तान टाइम्स

रवींद्र सेतु की जगमग तस्वीर                                                                                                                                    छवि स्त्रोत: हिंदुस्तान टाइम्स

इस बार मौका अलग था। इस बार हावड़ा पुल नन्ही रोशनियों से भिगी हुयी है और हमेशा की तरह लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुयी है।

इसी 3 फरवरी को हावड़ा पुल के 75 वर्ष पूरे हुये हैं। इसके लिये विशेष अनुष्ठान करना तो बनता था और इसकी संचालक कोलकाता पत्तन न्यास (पोर्ट ट्रस्ट) ने पूरे पुल को सजाने के लिये बहुरंगी एलईडी बत्तियों का उपयोग किया। यह न्यास ही हावड़ा पुल की रखरखाव, सजावट, स्वच्छता और प्रकाश का इंतजाम करती है।

न्यास प्रमुख विनीत कुमार के अनुसार, एलईडी बत्तियाँ पुल को रोशनी से सराबोर कर देगी। पुल सप्ताह में हर दिन अलग-अलग रंगों की रोशनी से जगमगायेगी।

हावड़ा पुल हमारे देश की उत्कृष्टतम वास्तुकलाओं में से एक है और यह भारतीय इंजीनियरिंग की सर्वश्रेष्ठ मिसाल है। इसकी संरचना झूला आधारित है और हमारे देश में गिने-चुने जगहों में ही ऐसी पुलें मौजूद हैं।

हावड़ा पुल बारेमा

हावड़ा पुल का आधिकारिक नाम रवींद्र सेतु है जिसका नाम प्रसिद्धतम कवि और समाज सुधारक स्वर्गीय रवींद्रनाथ ठाकुर (टैगोर) पर रखा गया है। यह पुल हुगली नदी के किनारे स्थित जुड़वा शहरों कोलकाता और हावड़ा को जोड़ती है। इस पुल को खंभों के बजाये बहुधारक (झूला) पैमाने पर निर्मित किया गया है।

टाटा ने भी याद किया

इस स्वर्णिम अवसर पर टाटा स्टील भी खुद को इससे दूर नहीं रख पायी। इस पुल के निर्माण में टाटा स्टील की महत्वपूर्ण भूमिका थी। इस पुल के निर्माण में जिस इस्पात (स्टील) का इस्तेमाल हुआ था, वह भारत की प्रथम उच्च-टैंसाइल इस्पात थी। टाटा ने कुल 23,500 टन इस्पात की आपूर्ति की थी।tata steel memories with Howrah bridge

उपरोक्त छवि टाटा की देश तथा हावड़ा पुल के प्रति समर्पण की निशानी है। यह छवि टाटा स्टील की आधिकारिक सजाल से ली गयी है। इसके साथ टाटा स्टील ने एक संदेश भी लिखा है जो नीचे दिया गया है।tata steel memories with Howrah bridge-statement

हिंदी में, टाटा स्टील का संदेश:

रवींद्र सेतु, या कोलकातावासियों के हावड़ा पुल ने 3 फरवरी, 2018 को अपना 75वाँ वर्ष पूरा किया। यह टाटा स्टील के लिये गर्व की बात है कि वह देश की वास्तुकला प्रतीक के निर्माण से जुड़ी सहयोगी है। पुल की कल्पना के बाद हमें ब्रिटिश विनिर्देशों (स्पेशिफिकेशन) के अनुसार 23,500 टन इस्पात की आपूर्ति करने को कहा गया था। हमने जीतोड़ मेहनत और अनुसंधान के बूते भारत की प्रथम उच्चतन्यी इस्पात टिस्क्रोम पेश किया। टाटा स्टील (द्वारा) निर्मित हावड़ा पुल में उपयुक्त इस्पात का 90 प्रतिशत हिस्सा टाटा का था जो नवोन्मेष (इनोवेशन) और ढृढ़ संकल्प का एक वादा है।

इस चमत्कार की 75वीं वर्षगांठ मनाने के लिये टाटा स्टील ने एक कोफी टेबल पुस्तक भी जारी की है।

आप इस पुस्तक को इस कड़ी से डाउनलोड कर सकते हैं।

अंत में, हमारी तकनीक की पूरी दल की ओर से, टाटा का यह शानदार उपहार:

tribute from tata steel to howrah bridge

टाटा स्टील और तकनीक का हावड़ा पुल को सलाम

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