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फेसबुक अब अमेरिकी चुनाव विज्ञापनदाताओं को सत्यापित करने के लिये डाक का प्रयोग करेगी

अंतिम अद्यतित: 1051-22022018

फेसबुक ने इस बार अमेरिकी चुनाव के लिये कमर कस ली है कि वह इस बार किसी को भी छूट नहीं देने वाली है। फेसबुक की योजनानुसार, वह अमेरिकी डाक सेवा के जरिये अमेरिकी चुनाव के विज्ञापन खरीदने वालों को सत्यापन डाकपत्र भेजेगी। इस डाकपत्र में एक विशेष कोड (कूट) होगा जिसे विज्ञापनदाता फेसबुक को देकर साबित करेंगे कि वे संयुक्त राज्य अमेरिका में ही रह रहे हैं।

यह नयी सत्यापन प्रणाली फेसबुक पर सभी प्रकारीय विज्ञापनों के लिये अनिवार्य होगी जिनमें संघीय कार्यालय के लिये होने वाली चुनावों में किसी उम्मीदवार का जिक्र होगा। इस प्रणाली का उपयोग राष्ट्रपति चुनाव के लिये भी की जा सकेगी। इसका पहला उपयोग इसी नवंबर में होने वाली मध्यावधि चुनावों में होगा।

“यदि आप किसी विज्ञापन में कोई अभ्यर्थी का जिक्र करते हैं, तब हम आपको एक डाकपत्र भेजेंगे और आपको उस कूट का इस्तेमाल करके साबित करना पड़ेगा कि आप संरा अमेरिका में ही हैं”, कैटी हारबथ, नीतिगत कार्यक्रम की वैश्विक निदेशक, फेसबुक ने राइटर्स से कहा।

यह सत्यापन पद्धति उन विज्ञापनों के लिये आवश्यक नहीं होगी जो राजनीतिक मुद्दों पर केंद्रित होंगे – केवल उन्हीं पर लागू होंगे जो किसी निर्वाचन अभ्यर्थी का जिक्र करेंगे।

हालाँकि यह पद्धति नयी नहीं है, गूगल की गूगल मेरा व्यवसाय और नैक्स्टडोर ऐसा पहले से कर रही है जब वे किसी व्यापार या उपयोक्ताओं जो किसी बंद समूह में शामिल होना चाहते हैं, को सत्यापित करना चाहते हैं।

कैटी ने राइटर्स से हामी भरी कि यह प्रक्रिया सबकुछ हल नहीं कर पायेगी पर यह फेसबुक का उठाया एक सख्त कदम है जो फेसबुक के जरिये अमेरिकी चुनावों को प्रभावित करने वाली विदेशी ताकतों को फर्जी नामों के साथ धन खर्च करने से रोक सकती है।

इससे उन विज्ञापनों को पहचानने में अकाट्य सफलता मिल सकती है जो फर्जी नामों के सहारे चल रहे होंगे और उपयोक्ताओं को उन विज्ञापनों के बारे में सही जानकारी मिल पायेगी कि कोई विज्ञापन सही है या फर्जी। इससे मतिभ्रम की स्थिति से अवश्य बचा जा सकेगा।

यह कदम अमेरिका में रूसी दुष्प्रचार पर आरोप दायर करने के तुरंत बाद उठाया गया है। वर्ष 2016 अमेरिकी इतिहास के लिये दर्दनाक वर्ष रही जब उसके शीर्ष नेतृत्व के निर्वाचन में कथित रूसी दुष्प्रचार का इस्तेमाल करके तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति निर्वाचन को कुप्रभावित करने के लिये कई फर्जी नामों के साथ फेसबुक पर राजनीतिक गर्मागर्मी को भी दिग्भ्रमित करने की सफल चेष्टा हुयी।

फेसबुक उस दौरान भले ही मूकदर्शक बनी रही और चुनाव के बाद उसने अपनी गलती स्वीकार कर ली लेकिन इस घटना के बाद उसे ऐसा तरीका खोजना ही था जो अगले चुनावों में उसकी फजीहत होने से बचा सके। अब नवंबर का इंतजार है जब वह वाकई अमेरिकियों को डाक से पत्र भेजेगी और तभी लोगों का सही प्रतिसाद मिल पायेगी।

छवि स्त्रोत: Pexels.com

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