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बिल गेट्स के अनुसार, प्रौद्योगिकी कंपनियाँ सरकारी नियमन को आमंत्रित कर रही हैं

बिल गेट्स ने सख्त लहजे में कह दिया है कि बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियाँ सरकारी नियमन के प्रति लापरवाह दिख रही है। यह बात उन्होंने एक हालिया साक्षात्कार में कहा।

बकौल गेट्स, एपल और अन्य प्रौद्योगिकी कंपनियाँ सरकारी निगरानी की तौहमत चाहती हैं। “वे ऐसा कहते-सोचते हैं कि सरकार उनकी सोच के साथ मिलकर काम करे जबकि हकीकत में ऐसा नहीं हो सकता है। सरकार उनके साथ उनके तरीकों से काम करना पसंद नहीं करेगी।”

जब गेट्स से उदाहरण पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वित्तीय लेनदेन को अज्ञात और अदृश्य बनाने से और सरकार को किसी हत्यारे के संदेश नहीं देकर यह जताना कि इससे उनके उपयोक्ताओं की निजता को खतरा है, गलत है।

जब उनसे आईफोन अनलोक मामले पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने सधा जवाब दिया कि यहाँ योग्यता पर कोई प्रश्न नहीं है बल्कि यह इच्छाशक्ति की बात है।

यह प्रतिसाद 2015 की सैन बर्नार्डिनो गोलीबारी से जुड़ी आईफोन पर एफबीआई और एपल संबंधी विवाद पर थी। हालाँकि एफबीआई ने एपल की मदद के बिना ही आईफोन को अनलोक (अबद्ध) कर लिया था पर एपल रट लगाती रही कि इस मामले से उसकी उपयोक्ता निजता को खतरा पहुँचेगी।

“हम एफबीआई की माँग के विरुद्ध हैं कि एपल आईफोन में बैकडोर बनाये क्योंकि हमारा मानना है कि यह गलत है और इसके गंभीर नतीजे हो सकते हैं”, उस समय एपल ने अपने बयान में कहा था। “एपल अमेरिका और दुनियाभर में रह रहे लोगों की आँकड़ा सुरक्षा को लेकर प्रतिबद्ध है। एक के लिये दरवाजा खोलने पर अन्य दरवाजे खुल सकते हैं जो भविष्य में जोखिम बन जायेंगे।”

उस समय गेट्स ने सार्वजनिक तौर पर कहा था कि एपल की चिंतायें गैरजरूरी है क्योंकि वह अनुरोध केवल एक उपकरण के लिये थी, नाकि सभी एपल उपकरणों के लिये। “कोई बैकडोर के बारे में बात नहीं करना चाहते हैं। यह एक विशिष्ट प्रकरण है जहाँ सरकार किसी उपकरण में सहेजित सूचना तक पहुँचना चाहती है”, गेट्स ने 2016 में फाइनेंसियल टाइम्स से कहा था।

पिछले साल, गेट्स ने रैड्डिट पर कूटलेखित आँकड़ों (एनक्रिप्टेड डाटा) तक सरकारी सुगमता के साथ उपयोक्ता सुरक्षा और निजता में संतुलन बनाने पर जोर दिया था। “वे सरकारों के साथ संतुलन बनाने पर प्रस्ताव दे सकते हैं ताकि सरकार कुछ मामलों में चीजें आसानी से जान सके और उसके साथ यह भी तय हो जाये कि ये सिर्फ उपयुक्त मामलों तक ही सीमित रहेंगे। इस बहस से बचना मुश्किल है और वे ही तय कर सकते हैं कि यह संतुलन कैसे रह पायेगी।”

छवि स्त्रोत: techhive.com

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