Reports, TECHNOLOGY

विज्ञापन से कमाई घट रही है, प्रौद्योगिकी निवेश एप और स्टार्टप की ओर जा रही है

किसी को शक नहीं होना चाहिये कि बड़ी नेटवर्क कंपनियों के विज्ञापन राजस्व आगामी वर्षों में घटते जा रहे हैं।

फेसबुक और गूगल को एक तरफ छोड़ दें तो नेटफ्लिक्स, अमेजन और अन्य स्ट्रीमिंग सेवाओं की बाढ़ आने के कारण विज्ञापन समर्थित मनोरंजन व्यापार गंभीर दौर से गुजर रही है।

वर्तमान में कई कंपनियों की सजालों पर प्रदर्शित विज्ञापनों की संख्या घट रही है और यह धीरे-धीरे घटती ही जायेगी। आप यूट्यूब के रेड संस्करण (भुगतान संस्करण) का ही उदाहरण ले लीजिये। हालाँकि, यूट्यूब रेड भारत में उपलब्ध नहीं है और दुनिया के कुछ चुनिंदा देशों में ही अपनी सेवायें दे रही है।

उपरोक्त आरेख विश्लेषण फर्म मोफेट्ट नाथनसन ने तैयार की है जो वर्तमान हालात में वस्तुस्थिति से अवगत कराती है।

किंतु कई कंपनियाँ मानती हैं कि विज्ञापन से होने वाली कमाई में घटोतरी के बावजूद उनके पास कमाई के अपार संसाधन मौजूद हैं। इन कंपनियों का मानना है कि उनके एप कारोबार और स्टार्टपों में निवेश ने उन्हें एक नया विकल्प दिया है।

यह किसी से छुपा नहीं है कि धन बनाने और उपभोक्ताओं के साथ गहरा संबंध बनाने के लिये एप एक शानदार तरीका है। प्रौद्योगिकी नेटवर्क का भविष्य है और इसे आप अमेरिकी फिल्मों के बजट से समझ सकते हैं जहाँ प्रौद्योगिकी उनकी कई फिल्मों को हजार करोड़ का कारोबार करवा देती है।

कई कंपनियाँ सब्सक्रिप्शन आधारित सेवायें प्रस्तुत कर रही हैं और उपभोक्ताओं द्वारा हाथों-हाथ बिक रही है। कंपनियों को बखूबी पता है कि उपभोक्ता उनसे क्या अपेक्षा रखते हैं और वे अपना आधार बढ़ाने के लिये बिल्कुल वैसी सामग्रियाँ ला रही हैं जैसा उनके ग्राहकों की जरूरत है।

एक चीज धरातल पर स्पष्ट होती जा रही है कि प्रौद्योगिकी में जो जितना सीखेंगे, वही उतनी गुना आगे बढ़ेंगे। हालाँकि यह पंक्ति जीवन की हर पहेली में सही दुरुस्त बैठती है पर प्रौद्योगिकी एकमात्र ऐसी क्षेत्र है जहाँ आपको हर रोज नया करना पड़ता है वर्ना आपको भुलाने में एक मिनट का समय भी कम पड़ जाता है।

लोगों को एप आधारित सेवायें देकर कंपनियाँ उपभोक्ताओं को उनकी मनपसंद सामग्रियाँ प्रस्तुत कर रही हैं और लोग उनसे जुड़ते भी जा रहे हैं क्योंकि उन्हें उनकी मनमाफिक सुविधायें मिल रही है। और ऐसा हर क्षेत्र में हो रहा है, चाहे कार्टून हो या वीडियो या खेल। यहाँ ग्राहकों को नियंत्रित करना भी आसान है जहाँ वे तय करते हैं कि ग्राहकों को कैसे और किस तरह बेहतर अनुभव मिलेगी।

इस तरह कंपनियाँ एप में बहुतेरे विज्ञापन दिखाकर कुछ रुपये कमा सकती है और धनार्जन का एक और स्त्रोत खोल सकती है।

इसके साथ कंपनियाँ अपनी बाजारवादी (विपणन पढ़िये) नीतियों में भी मौजूदा परिदृश्य के हिसाब से बदलाव कर रही है। वे अब टीवी और पोस्टर की दुनिया से निकलकर सीधे ग्राहकों से मुखातिब होने के लिये आकर्षक प्रचार का तरीका आजमा रही हैं।

कंपनियाँ ऐसे स्टार्टप में धन लगा रही हैं जो आपको प्रत्यक्ष अनुभव दिलाने में काम कर रही है। इससे इन कंपनियों को दो तरह का फायदा होता है- एक तो इन कंपनियों को उन स्टार्टपों में अहम हिस्सेदारी मिलती है और दूसरा, उन स्टार्टपों के ग्राहकों से सीधे संवाद का मौका भी मिल सकता है। बड़ी कंपनियों का साथ मिलने से इन स्टार्टपों के ग्राहकों को बेहतर अनुभव और मनोरंजन की गारंटी भी मिल जाती है।

आज वह दौर नहीं है जब आप किसी से सिर्फ इसीलिये संबंध बनाते थे क्योंकि आपका उनके साथ कोई आर्थिक नाता था। आपको अपने ग्राहकों के साथ प्रगाढ़ संबंध के साथ उनकी सुविधाओं-असुविधाओं का भी ख्याल रखना पड़ता है क्योंकि यह दौर उपभोक्तावाद का है जहाँ सबकुछ चरम पर होता है और केवल उपभोक्ताओं के लिये होता है।

अगर आपके मोबाइल में किसी कंपनी का एप मौजूद है तो उस कंपनी के लिये इससे सुनहर अवसर क्या होगा जब वह आपके साथ जुड़ना चाहती है और आपके सहारे हजारों-लाखों बनाना चाहती है। आज के प्रगतिशील दौर में एकदूसरे का साथ मिलने से आप जल्दी तरक्की करने लगते हैं और प्रौद्योगिकी कंपनियाँ इसे बखूबी जानती और समझती हैं इसीलिये अपने ग्राहकों के साथ जुड़े रहने का हर एक बहाना ढूँढती रहती है।

क्या आप जानते हैं कि आपके द्वारा पढ़ा गया यह पोस्ट हजारों को प्रेरित करने वाली है? यदि इसका जवाब सकारात्मक है तो आप अपने वही विचार यहाँ भी दे सकते हैं।

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.