Ananya, ENTERPRISE

फेसबुक को न्यूजफीड पर मुँह खोलना ही पड़ेगा

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फेसबुक हमारा विश्वास खो रही है और इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि व्यक्तिगत स्तर पर, कोई (फेसबुक कर्मचारी भी) यह नहीं बोल/समझ पा रहे हैं कि वे न्यूजफीड पर कोई चीज क्यों देखते हैं। कंपनी साधारण तरीके से फीड की सामग्री के बारे में बोल सकती है कि अधिकतर पोस्ट उनके मित्रों व परिजनों के हैं जो वरीयतानुसार (रैंकिंग) उनकी फीड पर नजर आती है जिन्हें फेसबुक मानती है कि आपको उन पोस्टों को देखना ही चाहिये।

लेकिन सबसे बड़ी गफलत यही है कि ये पोस्ट क्रमवार ही क्यों होते हैं एवं इसकी व्याख्या किसी के पास नहीं है, फेसबुक इंजीनियर के पास भी नहीं।

दिक्कत यह है कि कोई नहीं समझ पा रहे हैं कि उनकी फेसबुक फीड पर कोई विज्ञापन क्यों दिख रही है और उसी कंपनी की विज्ञापन क्यों दिख रही है जिनका जिक्र उन्होंने कहीं किया था या फिर कोई पोस्ट दोबारा क्यों नजर आती है जिन्हें आप एक-दो घंटे पहले देख चुके होते हैं। फेसबुक ऐसा किस आधार पर सोचती है कि जब आप कोई पोस्ट दोबारा देखेंगे, तो आप उसपर टिप्पणी या पसंद कर ही लेंगे।

यह समय फेसबुक की व्याख्या का है। कोई आलेख (आर्टिकल) आपके न्यूजफीड में क्यों दिखती है या किसी एक व्यक्ति की एकाधिक पोस्ट क्यों दिखने लगती है?

इस क्यों प्रश्न का उत्तर देना फेसबुक के लिये तकनीकी चुनौती होगी परंतु इसका हल निकालने से इसकी विश्वसनीयता में बढ़ोतरी ही होगी। कंपनी जिस तरह कृत्रिम बुद्धिमता (आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस) में अपने काम का बिगुल बजा रही है, ऐसे में व्याख्यात्मकता इस कड़ी की महत्वपूर्ण हिस्सा जरूर होगी।

साभार: theverge

क्या आप जानते हैं कि आपके द्वारा पढ़ा गया यह पोस्ट हजारों को प्रेरित करने वाली है? यदि इसका जवाब सकारात्मक है तो आप अपने वही विचार यहाँ भी दे सकते हैं।

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